क्या बिहार में उच्ची जाति में जन्म लेना अभिशाप है ? विगत कई वर्षो से जो भी राजनीतिज्ञ देखने में आ रहे है ,वोट के लिए पहला हथियार यहि बनाये कि उच्ची जाति वालो को पीछे धकेलो तभी बाकि जाति वाले का वोट मिल सकेगा । मैंने देखा है कि लालू जी के शासन में उनके पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा उच्ची जाति वालो को ऐसे देखा जाता था या उनसे बात भी इस अंदाज़ में किया जाता था कि वे उनलोगों के सामने कोई मदारी हो ,अब काम तो सभी जाति वालो को करना पड़ता है लेकिन गलती से बड़ी जात वाले कहीं फंस गए तो समझो मुफ्त का मुसीबत मोल लिए । सोचता हूँ कि शायद लालू जी ऐसा नहीं चाहते होंगे कि किसी भी आदमी का अपमान हो चाहे वो किसी जाति से हो , लेकिन इतना तो है कि वो जानते हुए भी चुप थे क्यूंकि इससे बाकि जाति वाले के इगो को वे संतुस्ट कर पा रहे थे । व्यक्तिगत रूप से जो मेरी समझ है वे बहुत साफ़ दिल के आदमी है ,नहीं तो ऐसा नहीं होता कि जिसने भी उनका साथ ईमानदारी से दिया , सबको उन्होंने कुछ न कुछ कर दिया ।
बहुत इंतज़ार के बाद नीतिश जी से आशा बंधी ,इन्होने बिहार में विकास सच में करना चाहा बहुत कुछ किए भी ,लगा प्यासे को निर्मल जल मिल गया ,बंद पड़े इंजीनियरिंग कॉलेज चालू हुआ आई आई टी खुल गया ,मेडिकल कॉलेज ,हॉस्पिटल सब सही २ काम करने लगे ,बिहार कि करीब २ सभी सड़के जो थी ही नहीं बना दिए गए या बन रहे है , नाला भी बने ,सबसे बड़ी बात कानून व्यवस्था सुधर गया ,आज कहीं भी कभी भी जाने आने में उतना डर नहीं लगता ,इसके लिए वे धन्यवाद के योग्य निश्चित ही हैं ।
लेकिन एक बात मेरे समझ में अभी भी नहीं आई कि इन्होने पंचायेत चुनाव में आरक्षण इतना क्यूँ लागु किया , क्या ये उचित है कि जाति विशेष के होने के नाते ही कोई शरापंच बन जाए ,भले वो पढ़ा- लिखा न हो ,क्या न्याय कर सकता है ऐसा आदमी ?
वर्षो से रोजगार नहीं था अपने बिहार में , नीतिश जी ने शिक्षक कि नियुक्ति कि ,बहुत खुशी हुयी कि अब बिहार सच में बदल रहा ,लेकिन ये क्या शिक्षको को तो इतना वेतन दिए कि इससे ज्यादा किसी दुसरे स्टेट में मजदूरी कर के मिल जाएगा । जरा सोचे एक ही स्कूल में पहले वाले शिक्षक जितना काम करते है , कही उससे ज्यादा नए लोग उत्साह से काम करते है ,लेकिन वेतन ?? अब शर्म आती है चपरासी भी इज्ज़त करने से दूर २ भागता है ,बोलता है ये बेचारा किस्मत का मारा नहीं तो भला ये नौकरी करता ? हद हो गई साहेब ।
मुझे लगता है यहाँ भी जात कि ही राजनीति हो रही है ,बहाली में ज्यादा पढ़े लोग उच्ची जात से ही मिल गए है ,अब बहाली तो कम से कम मुखिया जी करेंगे , तभी तो वोट के लिए मुखिया जी
मेहनत करेंगे , इसीलिए तो छठी पास मुखिया जी मास्टर डिग्री वाले को बहल करते है ।
नीतिश जी कि पार्टी कहती है कि हमलोग जात कि राजनीति नहीं करते , मेरा सोचना है कि इसीलिए किसी ब्रह्मण को चुनाव में उनकी पार्टी टिकट नहीं देती ।
शायद आने वाले समय में लालू और नीतिश जी दोनों कुछ सोचेंगे ।
सोमवार, 21 सितंबर 2009
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